भाजपा का उदय और नरेंद्र मोदी का नेतृत्व रहा है।
कांग्रेस का प्रभुत्व घटा, भाजपा ने केंद्र और राज्यों में अपना विस्तार किया, साथ ही कई बड़े नीतिगत फैसले जैसे नोटबंदी, GST, CAA और डिजिटल इंडिया ने राजनीति और शासन की दिशा बदल दी।**
राजनीतिक बदलाव :
भाजपा का उदय:** 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने कांग्रेस की 10 साल की सत्ता समाप्त की। इसके बाद भाजपा ने केंद्र और 19 राज्यों व 2 केंद्रशासित प्रदेशों में शासन स्थापित किया।
कांग्रेस का पतन:** कांग्रेस अब मुख्य विपक्षी दल रह गई, लेकिन उसका जनाधार लगातार कमजोर हुआ।
नई संसद भवन:** 2023 में नया संसद भवन उद्घाटित हुआ, जो भारतीय विरासत और आधुनिकता का प्रतीक माना गया।
प्रमुख नीतिगत फैसले
नोटबंदी (2016):** काले धन और नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए ₹500 और ₹1000 के नोट बंद किए गए।
GST (2017):** पूरे देश में एकीकृत कर प्रणाली लागू हुई।
CAA (2019):** नागरिकता संशोधन अधिनियम ने व्यापक विरोध और बहस को जन्म दिया।
कृषि कानून (2020):** किसानों के विरोध के बाद 2021 में वापस ले लिए गए।
शासन और प्रशासन
डिजिटल इंडिया:** ई-गवर्नेंस, आधार आधारित सेवाएं और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला।
Minimum Government, Maximum Governance’:**
नौकरशाही को कम कर नागरिक-केंद्रित नीतियों पर जोर दिया गया।
महिला सशक्तिकरण:**
उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं से महिलाओं को लाभ मिला।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
भारत की वैश्विक पहचान:** मोदी सरकार ने विदेश नीति में सक्रिय भूमिका निभाई, G20 की अध्यक्षता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति मजबूत हुई।
आर्थिक शक्ति:** भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
चुनौतियाँ और विवाद
संस्थागत केंद्रीकरण:** सत्ता का केंद्रीकरण और विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठे।
जन आंदोलनों का दबाव:** कई बार सरकार को विरोध के चलते नीतियों में बदलाव करना पड़ा, जैसे भूमि अधिग्रहण बिल और कृषि कानून।
संक्षेप में, 2014 के बाद भारतीय राजनीति में **भाजपा का प्रभुत्व, बड़े नीतिगत बदलाव, डिजिटल शासन और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत** सबसे अहम परिवर्तन रहे हैं। क्या आप चाहेंगे कि मैं इन बदलावों को सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों** के आधार पर एक तुलना तालिका में प्रस्तुत करूँ?
राजनीतिक बदलाव :
भाजपा का उदय:** 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने कांग्रेस की 10 साल की सत्ता समाप्त की। इसके बाद भाजपा ने केंद्र और 19 राज्यों व 2 केंद्रशासित प्रदेशों में शासन स्थापित किया।
कांग्रेस का पतन:** कांग्रेस अब मुख्य विपक्षी दल रह गई, लेकिन उसका जनाधार लगातार कमजोर हुआ।
नई संसद भवन:** 2023 में नया संसद भवन उद्घाटित हुआ, जो भारतीय विरासत और आधुनिकता का प्रतीक माना गया।
प्रमुख नीतिगत फैसले
नोटबंदी (2016):** काले धन और नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए ₹500 और ₹1000 के नोट बंद किए गए।
GST (2017):** पूरे देश में एकीकृत कर प्रणाली लागू हुई।
CAA (2019):** नागरिकता संशोधन अधिनियम ने व्यापक विरोध और बहस को जन्म दिया।
कृषि कानून (2020):** किसानों के विरोध के बाद 2021 में वापस ले लिए गए।
शासन और प्रशासन
डिजिटल इंडिया:** ई-गवर्नेंस, आधार आधारित सेवाएं और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला।
Minimum Government, Maximum Governance’:**
नौकरशाही को कम कर नागरिक-केंद्रित नीतियों पर जोर दिया गया।
महिला सशक्तिकरण:**
उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं से महिलाओं को लाभ मिला।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
भारत की वैश्विक पहचान:** मोदी सरकार ने विदेश नीति में सक्रिय भूमिका निभाई, G20 की अध्यक्षता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति मजबूत हुई।
आर्थिक शक्ति:** भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
चुनौतियाँ और विवाद
संस्थागत केंद्रीकरण:** सत्ता का केंद्रीकरण और विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठे।
जन आंदोलनों का दबाव:** कई बार सरकार को विरोध के चलते नीतियों में बदलाव करना पड़ा, जैसे भूमि अधिग्रहण बिल और कृषि कानून।
संक्षेप में, 2014 के बाद भारतीय राजनीति में **भाजपा का प्रभुत्व, बड़े नीतिगत बदलाव, डिजिटल शासन और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत** सबसे अहम परिवर्तन रहे हैं। क्या आप चाहेंगे कि मैं इन बदलावों को सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों** के आधार पर एक तुलना तालिका में प्रस्तुत करूँ?
मोदी के सलाहकार और संविधान ?
आपका सवाल दो हिस्सों में बंटा है –
मोदी के सलाहकार
और संविधान।
मोदी के सलाहकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास औपचारिक रूप से "प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)" और नीति आयोग जैसी संस्थाएँ हैं, जो उन्हें सलाह देती हैं।
प्रधान सचिव:** पीएमओ में प्रधान सचिव (जैसे नृपेंद्र मिश्रा, फिर पी.के. मिश्रा) मोदी के प्रमुख प्रशासनिक सलाहकार रहे हैं।
नीति आयोग:** योजना आयोग को समाप्त कर 2015 में नीति आयोग बनाया गया, जो आर्थिक और सामाजिक नीतियों पर सलाह देता है।
विशेषज्ञ सलाहकार:** अर्थशास्त्र, विदेश नीति, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा मामलों में मोदी ने कई विशेषज्ञों और थिंक टैंकों से राय ली है।
राजनीतिक सलाहकार:** भाजपा संगठन और आरएसएस भी राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
संविधान और मोदी सरकार :
संविधान भारत की सर्वोच्च विधिक रूपरेखा है। मोदी सरकार ने कई बार संविधान का हवाला देकर बड़े फैसले किए हैं:
अनुच्छेद 370 हटाना (2019):** जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्छेद हटाया गया।
GST लागू करना (2017):** संविधान संशोधन के जरिए पूरे देश में एक कर व्यवस्था बनाई गई।
CAA (2019):** नागरिकता संशोधन अधिनियम लाया गया, जिस पर संविधान की मूल भावना और समानता को लेकर बहस हुई।
संविधान दिवस (26 नवंबर):** मोदी सरकार ने संविधान दिवस को अधिक महत्व दिया और इसे व्यापक रूप से मनाना शुरू किया।
संक्षेप में, मोदी के सलाहकारों में **PMO, नीति आयोग, विशेषज्ञ और संगठनात्मक नेतृत्व** शामिल हैं, जबकि संविधान के संदर्भ में उनकी सरकार ने कई ऐतिहासिक संशोधन और फैसले किए हैं।
क्या आप चाहेंगे कि मैं इन फैसलों को **संविधानिक दृष्टिकोण से – कौन से फैसले संविधान की मूल भावना के अनुरूप थे और कौन से विवादित रहे –** एक तालिका में समझाऊँ?
अमित शाह की भूमिका ?
अमित शाह की भूमिका भारतीय राजनीति में 2014 के बाद से बेहद निर्णायक रही है।
राजनीतिक रणनीतिकार
चुनावी प्रबंधन :
अमित शाह को भाजपा का "चाणक्य" कहा जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश का चुनावी प्रबंधन किया, जिससे भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली।
भाजपा अध्यक्ष (2014–2019):
इस दौरान उन्होंने संगठन को मज़बूत किया, बूथ स्तर तक पार्टी का विस्तार किया और भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी पार्टी बना दिया।
राज्य चुनावों में सफलता :
उनके नेतृत्व में भाजपा ने हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, असम, उत्तराखंड, त्रिपुरा और कई अन्य राज्यों में सरकार बनाई।
सरकार में भूमिका
गृहमंत्री (2019 से) :
अनुच्छेद 370 हटाना:** जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय उनके मंत्रालय से आया।
CAA (2019):** नागरिकता संशोधन अधिनियम को संसद में प्रस्तुत और पारित कराने में अहम भूमिका निभाई।
आंतरिक सुरक्षा:** आतंकवाद, नक्सलवाद और सीमा सुरक्षा पर सख्त नीतियाँ अपनाईं।
कानून व्यवस्था:** पुलिस सुधार और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को मज़बूत किया।
संगठन और मोदी के साथ तालमेल
- अमित शाह को नरेंद्र मोदी का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है।
- गुजरात से लेकर केंद्र तक, दोनों की जोड़ी ने भाजपा को एक अनुशासित और चुनावी मशीन में बदल दिया।
- शाह का संगठनात्मक कौशल और मोदी का जन-नेतृत्व मिलकर भाजपा की राजनीति की रीढ़ बने।
संक्षेप में, अमित शाह की भूमिका **चुनावी रणनीतिकार, संगठन निर्माता और गृहमंत्री के रूप में नीति-निर्माता** की रही है।
भारतीय संविधान के खिलाफ भाजपा सरकार के कार्य ?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कार्यों और नीतियों को लेकर विपक्षी दलों, नागरिक समाज और कानूनी विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर संविधान के सिद्धांतों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, सरकार और उसके समर्थक इन सभी कदमों को संवैधानिक दायरे में, देश की प्रगति और सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताते हैं।इस विषय पर दोनों पक्षों के मुख्य तर्क और दृष्टिकोण नीचे दिए गए हैं:विपक्ष और आलोचकों के मुख्य आरोपविपक्ष और नागरिक समाज के अनुसार भाजपा सरकार के निम्नलिखित कार्यों से संवैधानिक ढांचा प्रभावित हुआ है:स्वायत्त संस्थाओं पर प्रभाव: प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई (CBI) और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक व स्वायत्त संस्थाओं के कथित राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप। विपक्ष का कहना है कि इनका इस्तेमाल विरोधी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।संघवाद (Federalism) को कमजोर करना: राज्य सरकारों और राज्यपालों के बीच बढ़ते विवादों को लेकर आरोप हैं कि केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप कर रही है। विपक्ष इसे 'सहकारी संघवाद' की भावना के खिलाफ मानता है।अनुच्छेद 370 को हटाना: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के तरीके को आलोचकों ने स्थानीय जनता और विधानसभा की सहमति के बिना किया गया निर्णय बताया।नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA): इस कानून को आलोचकों द्वारा संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और धर्मनिरपेक्षता (Secularism) के मूल सिद्धांतों के विपरीत माना गया।अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश: असहमति जताने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं पर कड़े कानून (जैसे UAPA) लगाने को मौलिक अधिकारों का हनन बताया गया।संसदीय प्रक्रियाओं की अनदेखी: कई महत्वपूर्ण विधेयकों (जैसे कृषि कानून) को बिना विस्तृत संसदीय चर्चा या स्थायी समितियों (Standing Committees) को भेजे बिना पास कराने के आरोप लगे।सरकार और समर्थकों का पक्षभाजपा सरकार और उसके समर्थक इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए तर्क देते हैं कि उनके सभी कार्य संविधान के दायरे में और राष्ट्रहित में हैं:संविधान की सुरक्षा का संकल्प: भाजपा का कहना है कि सरकार डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान की सुरक्षा और उसके गौरव को बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा 'संविधान दिवस' मनाना इसकी एक मिसाल है।एक राष्ट्र, एक संविधान: अनुच्छेद 370 को हटाना पूरे भारत में एक समान संवैधानिक व्यवस्था लागू करने के लिए आवश्यक था, जिससे जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को भी भारत के सभी संवैधानिक अधिकार और आरक्षण का लाभ मिल सका।संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन: सरकार के अनुसार, संसद द्वारा पारित सभी कानून (जैसे CAA या कृषि कानून) पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बहुमत से पारित किए गए हैं।भ्रष्टाचार पर कानूनी कार्रवाई: जांच एजेंसियों (ED/CBI) की कार्रवाई पर सरकार का कहना है कि वे बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून सम्मत काम कर रही हैं।न्यायालयों का फैसला: सरकार का तर्क है कि उसके अधिकांश बड़े फैसलों (जैसे अनुच्छेद 370 हटाना, नोटबंदी, और ईडब्ल्यूएस आरक्षण) को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी संवैधानिक और वैध ठहराया है।

